शिरोधारा, दो शब्दों से मिल कर बना है “शिरो” यानी कि सिर और “धारा” अर्थात् प्रवाह या धार। इसलिए शि…
शिरोधारा, दो शब्दों से मिल कर बना है “शिरो” यानी कि सिर और “धारा” अर्थात् प्रवाह या धार। इसलिए शिरोधारा आराम पाने, तरोताजा होने और उपचार के लिए माथे पर निश्चित समय तक तेल की धार छोड़ना है। इस पद्धति का लक्ष्य चेतन में तरोताजा लाते हुए और स्वस्थ्य को बनाए रखते हुए शारीरिक व भावनात्मक संतुलन लाना है।
शिरोधारा की चार प्रकार की विशेष अवस्थाएं हैं तैलधारा, क्षीरधारा, तक्रधारा और जलधारा। यह शरीर के लिए एक प्रकार से बाह्य स्नेह है।
शिरोधारा कैसे कार्य करती है जैसा कि आयुर्वेद में कहा है,शिरोधारा प्राथमिक रूप से वात नाड़ी संस्था या तंत्रिका तंत्र पर कार्य करती है। इसका इस्तेमाल नसों को आराम पहुंचाने, वात को संतुलित रखने, नसों को शक्ति देनेऔर मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है।चेतना की उच्च अवस्था पाने के लिए ,माइग्रेन में आराम के लिए शिरोधारा सबसे अच्छी पद्धतियों में से एक है।
शिरोधारा के लाभ तंत्रिका तंत्र को शांत रखने के साथ सशक्त करता है। तनाव और उदासी से उबरने में मदद करता है। गर्दन और कंधों को आराम पहुंचाता है। लंबे समय से चली आ रही अनिद्रा और सिज़ोफ्रेनिआ (schizophrenia)में लाभदायक। मस्तिष्क और भावों को आराम पहुंचाता है। मस्तिष्क को तेज और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाता है। एंग्जाइटी, घबराहट माइग्रेन से छुटकारा दिलाती है। थकान, तनाव, हाइपरटेंशन अस्थमा दूर करता है। एकाग्रता स्मरण शक्ति बढ़ाता है। मस्तिष्क रक्त प्रवाह बढ़ाता है। शिरोधारा और पंचकर्म पद्धतियों पर अधिक जानकारी के लिए कॉल करे 86967 88842